A Ghazal by my father( Late )'Dr sabir Panipati'
पिताश्री ‘डॉ साबिर पानीपती’ की एक
ग़ज़ल
...
ASHQ ARMAAN –E-GHAM-E-DIL NAHI HONE PAATE
ASRAAT AAG KE ZAAEL NAHI HONE PAATE
अश्क़ अरमान-ए-ग़म-ए-दिल नहीं होने पाते
असरात आग के ज़ाइल नहीं होने पाते
BAN TO BAITHE HAI SHOEB AAP HAWAS KE SADKE
SURKHRU AAP SE BUZDILNAHI HONE PAATE
बन तो बैठे हैं शोएब आप हवस के सदक़े
सुख़र्रू आपसे बुज़दिल नहीं होने पाते
HEEJDE KITNE BHI BAHROOP BADAL KAR AAYE’N
SAPH-E-USH-SHAQ MEIN SHAAMIL NAHI HONE PAATE
हिजड़े कितने ही बहरूप बदल कर आयें
सफ़-ए-उश्शाक़ में शामिल नहीं होने पाते
JO KISI AUR KI KASHTI KO DUBONE NIKLE
KHUD BHI ASOODA-E-SAHIL NAHI HONE PAATE
जो किसी और की कश्ती को डुबोने निकले
ख़ुद भी आसूदा-ए-साहिल नहीं होने पाते
SAR HATHELI PE LIYE BAITH’Y HAIN JO DIL WAL’Y
VO HARAASA;N DAM-E-MUSJKIL NAHI HONE PAATE
सर हथेली पे लिए बैठे हैं जो दिल वाले
वो हरासां दम-ए-मुश्किल नहीं होने पाते
SAIQAL-E JAUHAR-E-KHUDDARI-E-‘SABIR ’ KE UDOO
KOOCHA-E-DOST MEIN SHAMIL NAHI HONE PAATE
सैक़ल-ए-जौहर-ए-ख़ुद्दारी-ए-‘ साबिर’ के अदू
कूचा-ए-दोस्त में दाख़िल नहीं होने पाते....
posted by ....prem Lata sharma
19/7/2014
१ ज़ाइल=नष्ट २ शोएब = सही रास्ता दिखने वाले ४ सफ़-ए-उश्शाक़ = आशिकों की पंक्ति ५ सुर्ख़रू= आज़ाद ६ आसूदा-ए-साहिल= किनारे का सम्पूर्णता 7 हरासां =डरना 8सैक़ल-ए-जौहर=रगड़ से पैदा होने वाली चमक का जलवा 9 अदू = दुश्मन See More
पिताश्री ‘डॉ साबिर पानीपती’ की एक
ग़ज़ल
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ASHQ ARMAAN –E-GHAM-E-DIL NAHI HONE PAATE
ASRAAT AAG KE ZAAEL NAHI HONE PAATE
अश्क़ अरमान-ए-ग़म-ए-दिल नहीं होने पाते
असरात आग के ज़ाइल नहीं होने पाते
BAN TO BAITHE HAI SHOEB AAP HAWAS KE SADKE
SURKHRU AAP SE BUZDILNAHI HONE PAATE
बन तो बैठे हैं शोएब आप हवस के सदक़े
सुख़र्रू आपसे बुज़दिल नहीं होने पाते
HEEJDE KITNE BHI BAHROOP BADAL KAR AAYE’N
SAPH-E-USH-SHAQ MEIN SHAAMIL NAHI HONE PAATE
हिजड़े कितने ही बहरूप बदल कर आयें
सफ़-ए-उश्शाक़ में शामिल नहीं होने पाते
JO KISI AUR KI KASHTI KO DUBONE NIKLE
KHUD BHI ASOODA-E-SAHIL NAHI HONE PAATE
जो किसी और की कश्ती को डुबोने निकले
ख़ुद भी आसूदा-ए-साहिल नहीं होने पाते
SAR HATHELI PE LIYE BAITH’Y HAIN JO DIL WAL’Y
VO HARAASA;N DAM-E-MUSJKIL NAHI HONE PAATE
सर हथेली पे लिए बैठे हैं जो दिल वाले
वो हरासां दम-ए-मुश्किल नहीं होने पाते
SAIQAL-E JAUHAR-E-KHUDDARI-E-‘SABIR
KOOCHA-E-DOST MEIN SHAMIL NAHI HONE PAATE
सैक़ल-ए-जौहर-ए-ख़ुद्दारी-ए-‘
कूचा-ए-दोस्त में दाख़िल नहीं होने पाते....
posted by ....prem Lata sharma
19/7/2014
१ ज़ाइल=नष्ट २ शोएब = सही रास्ता दिखने वाले ४ सफ़-ए-उश्शाक़ = आशिकों की पंक्ति ५ सुर्ख़रू= आज़ाद ६ आसूदा-ए-साहिल= किनारे का सम्पूर्णता 7 हरासां =डरना 8सैक़ल-ए-जौहर=रगड़ से पैदा होने वाली चमक का जलवा 9 अदू = दुश्मन See More
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